PM Surya Ghar की सब्सिडी खाते में कब आती है?
PM Surya Ghar subsidy kitne din mein aati hai अक्सर लोग यह पूछते हैं कि ₹78,000 का पैसा खाते में कब आएगा। कुछ वेंडर कहते हैं कि एक महीने में, कुछ कहते हैं कि चार महीने लग गए। और कुछ कहते हैं कि सरकारी पोर्टल पर एक स्टेटस बार बस टिमटिमाता रहता है। यह सब देखकर लगता है कि असली सच कौन सा है यह समझना मुश्किल होता है। इसके लिए पहले यह जानना जरूरी है कि प्रक्रिया कब शुरू होती है।
सरकार के अनुसार सब्सिडी कमीशनिंग सर्टिफिकेट जारी होने के बाद 30 दिन में खाते में आ जानी चाहिए। लेकिन कई वेंडर 30 से 45 दिन बताते हैं, और कुछ लोगों को 30 से 60 दिन लग गए। असल में गड़बड़ी यह होती है कि लोग इंस्टॉलेशन शुरू होने के साथ ही गिनती शुरू कर देते हैं। जब तक बिजली कंपनी (DISCOM) पूरा सिस्टम जांच नहीं करती, तब तक आपका सिस्टम अधूरा माना जाता है।
मान लीजिए आपने जनवरी की शुरुआत में पोर्टल पर आवेदन किया। पहले डिस्कॉम आपकी छत और कनेक्शन की जांच करती है, जिसमें आमतौर पर एक से दो हफ्ते लगते हैं। फिर वेंडर आकर पैनल लगाता है, जो कुछ दिन में खत्म हो जाता है। असली इंतजार इसके बाद शुरू होता है, जब नेट मीटर लगाना होता है और डिस्कॉम के आदमी को जांच के लिए आना होता है। इसमें 15 से 30 दिन लग सकते हैं, कभी-कभी अधिक भी। जांच पास हो जाए तो कमीशनिंग सर्टिफिकेट दो से सात दिन में मिलता है। फिर आप पोर्टल पर अपना बैंक खाता दर्ज करते हैं। सब्सिडी की वास्तविक उम्मीद इसके बाद शुरू होती है।
इन सब के बाद आवेदन से सब्सिडी तक का सफर तीन से पांच महीने तक रह सकता है। जनवरी में आवेदन करें तो पैसा अप्रैल से जून के बीच में आ सकता है। इसलिए अपनी योजना इसी हिसाब से बनाना अच्छा रहता है।
देरी कहां होती है
सबसे बड़ी रुकावट नेट मीटर की होती है। कई बार इंस्टॉलेशन पूरा हो जाता है, पैनल बिजली बना रहे होते हैं, लेकिन डिस्कॉम के पास मीटर का स्टॉक नहीं होता। इसमें आप कुछ नहीं कर सकते, सिवाय बार-बार पूछने के।
राज्यों की रफ्तार अलग-अलग है। अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक 30 दिन का लक्ष्य केवल कुछ राज्यों में पूरा हो रहा था, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में तीन से पांच महीने लगना सामान्य था। यह चित्र बदलता रहता है। इसलिए अपने इलाके के ताजा हालात जानने के लिए अपने पड़ोसी या स्थानीय वेंडर से पूछ लेना अच्छा रहता है।
कुछ देरी हमारी लापरवाही से भी होती है। नेट मीटरिंग के लिए आवेदन इंस्टॉलेशन पूरा होने के तीस दिन के भीतर कर देना चाहिए, लेकिन कई वेंडर इसे टाल देते हैं और महीना निकल जाता है। अगर बैंक खाता आधार से जुड़ा नहीं है, या नाम बिजली बिल, आधार और बैंक में अलग-अलग है, तो पैसा अटक जाता है। छोटी बात लगती है, लेकिन महीनों तक खींच सकती है।
अंत में, जो पैनल और वेंडर होते हैं, वे भी देरी का कारण बन सकते हैं। अगर पैनल ALMM की मंजूरी वाली सूची में नहीं हैं, या वेंडर पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है, तो सब्सिडी खारिज हो सकती है। इस हालत में ₹30,000 से ₹78,000 तक का नुकसान सीधे आपकी जेब से हो जाता है।
इंतजार कम कैसे करें
असल काम इंस्टॉलेशन से पहले ही होता है। वेंडर से लिखित में पूछिए कि पैनल ALMM-अप्रूव्ड हैं या नहीं और वह पोर्टल पर पंजीकृत है या नहीं। फिर आधार-लिंक्ड चालू बैंक खाता तैयार रखिए, और जिस नाम से बिजली का कनेक्शन है, उसी से मिलता-जुलता नाम खाते में हो, यह देख लीजिए।
इंस्टॉलेशन के बाद उसी हफ्ते नेट मीटरिंग का आवेदन कर दीजिए और हर हफ्ते पोर्टल पर स्टेटस देखते रहिए। कमीशनिंग सर्टिफिकेट, इनवॉइस और आवेदन नंबर के स्क्रीनशॉट अपने पास रखिए। बाद में शिकायत करनी पड़े तो यही कागज आपकी बात को वजन देते हैं।
एक बात और, जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में DBT से आती है, इंस्टॉलर के पास नहीं। इंस्टॉलर आपकी तरफ से इसे क्लेम नहीं कर सकते। इसलिए अगर कोई वेंडर कहे कि “सब्सिडी हम खुद निकलवा देंगे, बस कुछ एडवांस दे दीजिए”, तो वहीं रुक जाइए। लोन लिया हो तो यह भी याद रखिए कि सब्सिडी अपने आप लोन में नहीं घटती। पहले वह आपके खाते में आती है, फिर आप चाहें तो उसे लोन की एकमुश्त किस्त के रूप में चुका सकते हैं।
और अगर पैसा फिर भी न आए
सबसे पहले pmsuryaghar.gov.in पर लॉगिन करके देखिए कि कमीशनिंग रिपोर्ट “Accepted” दिख रही है या नहीं, और बैंक की जानकारी सही भरी है या नहीं। रिपोर्ट स्वीकृत हो चुकी है और तीस दिन से ऊपर हो गए हैं, तो पोर्टल की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराइए। नब्बे दिन बाद भी कुछ न आए तो अपनी DISCOM की उपभोक्ता शिकायत शाखा या MNRE की हेल्पलाइन 1800-180-3333 पर बात कीजिए।
सीधी बात यह है कि सौर ऊर्जा लगाने के बजट बनाते समय मान लीजिए कि पहले आपको पूरा पैसा खर्च करना है और सब्सिडी दो से पांच महीने में लौटेगी। अगर पैसा जल्दी आ गया तो बोनस है, और अगर देर से आया तो भी आपकी योजना नहीं बिगड़ेगी। प्रक्रिया और समय-सीमा बदलती रहती हैं, इसलिए आवेदन से पहले पोर्टल और अपनी DISCOM से ताज़ा जानकारी ज़रूर ले लीजिए।